राज्य के15 नगरीय निकाय चुनाव के लिेए राज्य निर्वाचन आयोग ने अधिसूचना जारी कर दी है। तय कार्यक्रम के अनुसार 27 नवंबर तक नामांकन दाीिखल किया जाएगा, 20 दिंसबर को मतदान होगा तथा 23 दिसंबर को परिणाम सामने आ जाएंगे। इसी के साथ फिर यह साफ हो जाएगा कि जनता का विश्वास किस पर बढ़ा है तथा किस पर घटा है। किसकी लोकप्रियता बढ़ी है तथा किसकी लोकप्रियता घटी है। भाजपा व कांग्रेस दोनों के लिए मौका है। दोनों को फिर एक बार साबित करना है कि अब जनता किस पर ज्यादा भरोसा करती है। अब जनता के बीच कौन ज्यादा लोकप्रिय है। इससे पहले मरवाही उपचुनाव में भाजपा के पास यह साबित करने का मौका था कि वह राज्य मेंं कमजोर नहीं हुई है, लेकिन वह यह मौका चूक गई थी। सीएम भूपेश बघेल ने बड़ी कुशलता से मरवाही उपचुनाव जीतकर यह साबित किया था कि भाजपा अब उसका किसी भी क्षेत्र में मुकाबला नहीं कर सकती। भाजपा तो अब उसे टक्कर तक नहीं दे सकती। उसका हर चुनाव हारना तय है। मरवाही से पहले भी जो निगम या पंचायत के चुनाव हुए थे, वह भी कांग्रेस ने ही जीते थे।राज्य में कांग्रेस लोकसभा चुनाव को छोड़कर अब तक हुए सारे चुनाव जीतती रही है। इस आधार पर कहा जा सकता है भूपेश बघेल के नेतृ्त्व में कांग्रेस अब तक अपराजित रही है। नगर निकाय चुनाव की घोषणा होने के बाद कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष मोहन मरकाम ने दावा किया है कि सभी निकायों मे ंचुनाव कांग्रेस एकतरफा जीतेगी।वही भाजपा प्रदेश अध्यक्ष विष्णुदे साय ने कहा हैकि निकाय चुनाव के साथ ही कांग्रेस की हार का सिलसिला शुरू हो जाएगा। काग्रेस के पास मौका है कि वह कांग्रेस की नाकामियों को गिनाकर जनता का विश्वास ज्यादा से ज्यादा निकायों मेंं प्राप्त करे। वहीं कांग्रेस के पास मौका हैकि वह अपने काम के आधार पर जनता को भरोसा दिलाए कि वही उनके हित में काम कर रही है तथा अच्छा काम कर रही है। निकाय चुनाव के रिजल्ट से साफ हो जाएगा कि जनता किसके साथ है. जो ज्यादा सीटें जीतेंगा वही विजेता होगा। मरकाम ने कहा है कि कांग्रेस एकतरफा जीतेगी। तीन साल हो गए हैं सरकार को। इस दौरान सरकार ने कई अ्च्छे काम किए हैं तथा कई मामले में वह नाकाम रही है। चुनाव से यह पता चलेगा कि जनता ने उसकी नाकामियों को गंभीरता से लिया है या उससी सफलता को। भाजपा के सामने फिर एक मौका है कि वह साबित करे कि वह छत्तीसगढ में उसकी जड़े मजबूत हैं।वह कांग्रेस को हरा सकती है। इस बार भाजपा ज्यादा सीटें न भी जीत पाए तो वह कुछ सीटों पर हरा दे तो बड़ी बात होगी। सभी सीटों पर टक्कर दे दे तो भी बड़ी बात होगी। इससे भाजपा के कार्यकार्ताओं का खोया हुआ आत्मविश्वास लौट आएगा।