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नोबेल पुरस्कार: रसायन शास्त्र

रसायन शास्त्रियों का एक काम है कि वे विभिन्न पदार्थों से शुरू करके नए-नए पदार्थों का निर्माण करें। ये नए पदार्थ उर्वरक हो सकते हैं, सौर ऊर्जा को विद्युत ऊर्जा में बदलने वाले हो सकते हैं, ऊर्जा का भंडारण करने वाले हो सकते हैं या प्लास्टिक जैसी निर्माण व पैकेजिंग सामग्री में उपयोगी हो सकते […]

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नोबेल पुरस्कार: कार्यिकी/चिकित्सा विज्ञान

वर्ष 2021 का कार्यिकी/चिकित्सा शास्त्र का नोबेल पुरस्कार संयुक्त रूप से कैलिफोर्निया विश्वविद्यालय के डेविड जूलियस और आर्डेम पैटापुटियन को दिया गया है। इन शोधकर्ताओं ने यह समझाने में मदद की है कि हमें स्पर्श की बारीकियों और गर्म-ठंडे का एहसास कैसे होता है। डेविड जूलियस ने गर्मी के एहसास की अपनी खोजबीन में एक […]

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खाद्य पदार्थों का स्टार रेटिंग

-सोमेश केलकर सुप्रीम कोर्ट में एक जनहित याचिका में मांग की गई है कि सुप्रीम कोर्ट केंद्र को ऐसे दिशानिर्देश बनाने के निर्देश दे जो यह सुनिश्चित करें कि खाद्य उत्पाद के पैकेट पर सामने की ओर ‘स्वास्थ्य रेटिंग’ के साथ-साथ ‘स्वास्थ्य चेतावनी’ अंकित हो। याचिका में यह अनुरोध भी किया गया है कि डिब्बाबंद […]

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वायु गुणवत्ता के नए दिशानिर्देश

हर साल लगभग 70 लाख लोग वायु प्रदूषण के कारण मारे जाते हैं। इनमें से अधिकांश वे लोग हैं जो निम्न और मध्यम आय वाले देशों में रहते हैं। वायु प्रदूषण के कारण क्रॉनिक ऑब्सट्रक्टिव पल्मोनरी डिसीज़ (सीओपीडी), हृदय रोग, फेफड़े के कैंसर, निमोनिया और स्ट्रोक का जोखिम रहता है। गत 22 सितंबर को विश्व […]

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चीन विदेशों में कोयला बिजली घर निर्माण नहीं करेगा

हाल ही में चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने संयुक्त राष्ट्र महासभा में यह वचन दिया है कि उनका देश विदेशों में कोयला आधारित नई बिजली परियोजनाओं का निर्माण नहीं करेगा। यह निर्णय वैश्विक जलवायु के हिसाब से काफी स्वागत योग्य है। चीन दुनिया में नए कोयला संयंत्रों का सबसे बड़ा वित्तपोषक रहा है। लिहाज़ा, यह […]

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जीन थेरेपी से कैंसर का जोखिम

हाल ही में एक दुर्लभ तंत्रिका रोग के लिए उपयोग की जाने वाली जीन थेरेपी का क्लीनिकल परीक्षण रोक दिया गया है। परीक्षण में सहभागी एक व्यक्ति में अस्थि मज्जा सम्बंधी समस्या विकसित होने लगी थी जिससे भविष्य में ल्यूकेमिया की संभावना बढ़ सकती है। अध्ययन की आयोजक कंपनी ब्लूबर्ड बायो के अनुसार कैंसर शायद […]

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वैम्पायर चमगादड़ सहभोज करते हैं

एक नए अध्ययन में पता चला है कि मादा वैम्पायर चमगादड़ रात का भोजन अपने साथियों के साथ करना पसंद करती हैं। इसके लिए वे रात को शिकार के दौरान एक विशेष ध्वनि निकालती हैं। लगता है कि इससे उनको रक्तभोज हासिल करने के दौरान समय और उर्जा बचाने में मदद मिलती है। यह वैम्पायर […]

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फिलकॉक्सिया माइनेन्सिस: शिकारी भूमिगत पत्तियां

-डॉ. किशोर पवार चार्ल्स डार्विन ने 1875 में मांसाहारी पौधों पर एक किताब लिखी थी। तब से अब तक तकरीबन 10 कुलों में लगभग 20 मांसाहारी वंश (जीनस) पहचाने जा चुके हैं। तो, कुछ पौधे मांसाहारी क्यों होते हैं? इस संदर्भ में लाभ और लागत की गणना के आधार पर एक मॉडल विकसित किया गया […]

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जलवायु परिवर्तन और जीवाश्म ईंधन

हाल ही में नेचर में प्रकाशित एक अध्ययन का निष्कर्ष है कि यदि हम धरती के बढ़ते तापमान को थामना चाहते हैं तो हमें अपने जीवाश्म र्इंधन के 90 प्रतिशत आर्थिक रूप से व्यावहारिक भंडार को अछूता छोड़ देना पड़ेगा। जलवायु सम्बंधी पैरिस संधि में कहा गया है कि धरती का तापमान औद्योगिक-पूर्व ज़माने से […]

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गिद्धों पर नया खतरा

कुछ वर्षों पहले गिद्धों पर एक संकट आया था और गिद्धों की आबादी तेज़ी से घटी थी। 1990 के दशक में यह एक सामान्य अवलोकन था कि भारत में करोड़ों गिद्ध थे। इनके चलते जानवरों के शव तत्काल ठिकाने लग जाते थे। फिर अचानक गिद्धों की आबादी घटने लगी और काफी शोध के बाद पता […]

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विष्ठा प्रत्यारोपण से चूहों का दिल जवान होता है

यह तो जानी-मानी बात है कि बुढ़ापे के साथ दिमाग धीमा होने लगता है, आप भूलने लगते हैं और नए हुनर सीखने में परेशानी महसूस करते हैं। लेकिन अब चूहों पर किए गए प्रयोगों ने उम्मीद की एक धुंधली सी किरण दिखाई है। इस शोध ने दर्शाया है कि युवा चूहे के आमत के बैक्टीरिया […]

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बढ़ रही है जुड़वा बच्चों की संख्या

एक नए अध्ययन का निष्कर्ष है कि पूरी दुनिया में जुड़वा बच्चों की संख्या बढ़ रही है। 1980 के दशक से शुरू करें तो जुड़वा बच्चों की संख्या 30 प्रतिशत बढ़ी है। जहां 1980 से 1985 के बीच 1000 प्रसवों में जुड़वा प्रसव 9 होते थे वहीं 2010 से 2015 के बीच की अवधि में […]

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सार्स जैसे वायरस बार-बार आते हैं

पिछले दो दशकों में वैश्विक स्तर पर मात्र दो नए कोरोनावायरस उभरे हैं: सार्स-कोव (2003 में सार्स) और दूसरा सार्स-कोव-2 (कोविड-19)। लेकिन हाल ही में प्रकाशित एक रिपोर्ट के अनुसार शायद ये चमगादड़ों से छलकने वाले ऐसे ही वायरसों की एक तुच्छ बानगी भर हैं। शोधकर्ताओं का अनुमान है कि हर वर्ष लगभग 4 लाख […]

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दूध पीकर घुड़सवार चरवाहे युरोप पहुंचे

पांच हज़ार से अधिक वर्ष पहले आज यमनाया के रूप में पहचाने जाने वाले खानाबदोश वर्तमान रूस और यूक्रेन के घास के मैदानों से भारी बैल गाड़ियों में बाहर निकल पड़े थे। कुछ ही शताब्दियों में वे पूरे युरेशिया में फैल गए, और मंगोलिया से लेकर हंगरी तक की आबादी में अपने आनुवंशिक हस्ताक्षर छोड़ […]

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दीर्घ कोविड : बड़े पैमाने के अध्ययन की ज़रूरत

कई लोगों में कोविड-19 से उबरने के बाद भी कई हफ्तों या महीनों तक थकान, याददाश्त की समस्या और सिरदर्द जैसे लक्षण बने रहते हैं। ऐसा क्यों होता और इसका उपचार क्या है यह पूरी तरह पता करने के लिए बड़े पैमाने पर अध्ययन की ज़रूरत है। और हाल ही में यूएस के नेशनल इंस्टीट्यूट […]

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सार्स-कोव-2 की प्रयोगशाला-उत्पत्ति की पड़ताल

कोविड-19 वायरस के प्रयोगशाला से लीक होने की संभावना पर चर्चा जारी है। पूर्व अमेरिकी राष्ट्रपति ने तो इसे ‘चीनी वायरस’ तक कहा। दूसरी ओर, कई शोधकर्ताओं ने दी लैसेंट के माध्यम से प्रयोगशाला उत्पत्ति के सिद्धांत को खारिज कर दिया था। विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) के संयुक्त मिशन की रिपोर्ट में भी वायरस के […]

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हंसाता है, सोचने को विवश करता है इग्नोबेल पुरस्कार

हर वर्ष की तरह इस वर्ष भी पहली नज़र में हास्यास्पद लेकिन महत्वपूर्ण खोजों को पुरस्कृत करने के लिए 31वां इग्नोबेल पुरस्कार समारोह आयोजित किया गया। कोरोना महामारी के चलते इस वर्ष भी यह समारोह ऑनलाइन किया गया, जिसमें संगीतमय बिल्लियां, औंधे गेंडे और पनडुब्बी में कॉकरोच से बचाव आकर्षण का केंद्र रहे। इग्नोबेल पुरस्कार […]

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उपेक्षित न हों परंपरागत तिलहन

भारत डोगरा भारत सरकार ने 18 अगस्त को घोषित 11,040 करोड़ रुपए की स्कीम में पाम आयल का घरेलू उत्पादन तेज़ी से बढ़ाने के लिए इसके वृक्ष बड़े पैमाने पर लगाने का निर्णय किया है। इसके लिए खासकर उत्तर-पूर्वी राज्यों और अंडमान व निकोबार द्वीप समूह पर ध्यान दिया जाएगा। इस दौर में यह सुनिश्चित […]

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सूक्ष्मजीव नई हरित क्रांति ला सकते हैं

-डॉ. डी. बालसुब्रमण्यन, सुशील चंदानी पौधे अपनी बनावट में काफी सरल जान पड़ते हैं। चाहे छोटी झाड़ियां हों या ऊंचे पेड़ हों – सभी जड़, तना, पत्तियों, फूलों, फलों से मिलकर बनी संरचना दिखाई देते हैं। लेकिन उनकी बनावट जितनी सरल दिखती है उतने सरल वे होते नहीं हैं। एक ही स्थान पर जमे रहने […]

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डायनासौर आपसी युद्ध में चेहरे पर काटते थे

डायनासौर आपसी युद्ध में चेहरे पर काटते थे जब जीव अपने लिए प्रणय-साथी, अधिकार क्षेत्र या स्थान के लिए एक-दूसरे से लड़ते हैं। तो नज़ारा दर्शनीय व डरावना होता है। हाल ही में वैज्ञानिकों को इस बात के सबूत मिले हैं कि टायरेनोसॉरस रेक्स जैसे डायनासौर भी ऐसा ही करते थे। इस लड़ाई में वे […]